सोमवार, मई 02, 2011

हम क्यों कर हुए शायर ,

इश्क़ ने किस-किस को, क्या-क्या बना दिया ,
किसी को दरिया बना दिया ,किसी को सहरा बना दिया ,
जो लोग बढ़िया थे ,उनको  बद्त्तर बना दिया ,
जो लोग बद्त्तर थे ,उन्हें बढ़िया बना दिया ,
आँखें ले गया वो ,अपनी आंखों में फँसा कर , 
आँखें  होते हुए भी ,उसने हमे अंधा बना दिया , 
जलते हैं बेसबब ,बेदर्द वीराने में , तन्हाँ ही ,
उसकी आशिकी ने हमे ,बुझता दिया बना दिया ,
हम क्यों कर हुए शायर ,क्या हमसे  पूछते हो ,
बीमार -ए-इश्क़ थे बस  ,इसी बिमारी ने हमे शायर बना दिया ,
दास्ताँ क्या है हमारी '' अनंत '' बस इतना जान लो तुम ,
किसी को हमने मना किया ,किसी ने हमको मना किया ,
 तुम्हारा --अनंत  

3 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर पंक्तियाँ ..... ज़िन्दगी इसी उहा-पोह के साथ चलती रहती है....

Vivek Jain ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना .
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

अच्छे भाव,...